दुर्ग के सुपेला संडे मार्केट को किया जाएगा दूसरी जगह शिफ्ट, सड़क पर दुकान लगाने वालों को सख्त चेतावनी

दुर्ग जिले के सुपेला थाना क्षेत्र में हर रविवार लगने वाला संडे मार्केट अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। बाजार की वजह से इलाके में अक्सर भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि एंबुलेंस तक को निकलने का रास्ता नहीं मिल पाता। लोगों की लगातार शिकायतों के बाद अब जिला प्रशासन और भिलाई नगर निगम ने संडे मार्केट को दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी तेज कर दी है।

सुपेला से गधा चौक तक हर रविवार लगने वाला संडे मार्केट यातायात व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा देता है। सड़क के दोनों ओर कपड़े, जूते-चप्पल और घरेलू सामान की सैकड़ों दुकानें सज जाती हैं, जिससे पूरी सड़क बाजार में तब्दील हो जाती है। खरीदारों की भारी भीड़ के चलते वाहन रेंगते नजर आते हैं और घंटों तक जाम की स्थिति बनी रहती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि संडे मार्केट के कारण आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई बार आपात स्थिति में भी एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी जरूरी सेवाओं को रास्ता नहीं मिल पाता। इस समस्या को लेकर निगम और जिला प्रशासन द्वारा अब तक 5 से अधिक बार कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।

इसी कड़ी में शनिवार रात को पुलिस प्रशासन ने सुपेला से गधा चौक तक फ्लैग मार्च निकाला। इस दौरान व्यापारियों को सख्त हिदायत दी गई कि कोई भी दुकानदार सड़क पर दुकान न लगाए। प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रही और नियमों का पालन करने की समझाइश दी गई।

एसडीएम हितेश पिस्दा ने बताया कि सुपेला से गधा चौक तक सड़क पर लगने वाले बाजार को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। सड़क पर अतिक्रमण की वजह से दुर्घटना, ट्रैफिक जाम और यातायात बाधित होने की समस्या लगातार सामने आ रही थी। इसे लेकर व्यापारियों के साथ बैठक भी की गई, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि केवल निर्धारित और मार्किंग किए गए दायरे में ही दुकानें लगाई जाएं।

जिला प्रशासन ने साफ कहा है कि सड़क पर अतिक्रमण किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भिलाई नगर निगम ने संडे मार्केट को शिफ्ट करने के लिए वैकल्पिक खुली जगह की तलाश भी शुरू कर दी है।


अब बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार संडे मार्केट वास्तव में दूसरी जगह शिफ्ट हो पाएगा। इससे पहले भी कई बार प्रशासन ने शिफ्टिंग के दावे किए, लेकिन वे जमीन पर उतरते नजर नहीं आए। इस बार निगम और जिला प्रशासन अपने फैसले को अमल में ला पाते हैं या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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