बलौदाबाजार स्टील प्लांट ब्लास्ट: 900 डिग्री गर्म राख से 6 मजदूरों की मौत, 5 गंभीर, भट्टी क्रमांक-1 सील, मृतक परिवार को 45 लाख मुआवजा

बलौदाबाजार:
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के बकुलाही स्थित इस्पात (स्टील) प्लांट में गुरुवार को हुए भीषण औद्योगिक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। कोयला भट्टी के पास हुए जोरदार विस्फोट में 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तक की अत्यधिक गर्म राख मजदूरों पर गिर गई, जिससे 6 मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 5 मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। सभी घायलों का इलाज बिलासपुर के बर्न ट्रीटमेंट सेंटर में जारी है।

हादसे के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। कलेक्टर दीपक सोनी और पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। सुरक्षा के मद्देनज़र पूरे प्लांट क्षेत्र को सील कर दिया गया है और एसडीएम के निर्देशन में विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

🔥 कैसे हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के वक्त प्लांट में करीब 50 कर्मचारी कार्यरत थे। अचानक डस्ट सेटलिंग चैंबर से तेज धमाके की आवाज आई और उसी क्षण अत्यधिक गर्म राख बाहर निकलकर डीएससी और मेट स्क्रबर के आसपास काम कर रहे मजदूरों पर गिर गई। अन्य हिस्सों में मौजूद मजदूर तो भागने में सफल रहे, लेकिन पास में मौजूद 6 मजदूरों को बचने का मौका नहीं मिला।

👷‍♂️ बिहार-झारखंड के थे मजदूर

प्लांट के एचआर हेड राजेश कुमार सिंह ने बताया कि मृतक और घायल सभी मजदूर बिहार और झारखंड के रहने वाले थे। वे 8 जनवरी को रोजगार की तलाश में बलौदाबाजार आए थे और 9 जनवरी से काम शुरू किया था। सभी मजदूर आपस में पारिवारिक रिश्ते में जुड़े हुए थे। हादसे की सूचना तत्काल परिजनों को दी गई।

💰 मुआवजे का ऐलान

कंपनी प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को कुल 45 लाख रुपये प्रति परिवार मुआवजा देने की घोषणा की है।

  • तत्काल 20 लाख रुपये का चेक

  • बाद में 25 लाख रुपये अतिरिक्त सहायता

  • अंतिम संस्कार के लिए 25-25 हजार रुपये
    वहीं, घायल मजदूरों का पूरा इलाज कंपनी की ओर से कराया जा रहा है और उन्हें 5-5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

🚫 भट्टी क्रमांक-1 सील

प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन सामने आए हैं। बिना भट्टी शटडाउन किए मजदूरों से काम कराया जा रहा था। उन्हें हीट रेसिस्टेंट एप्रन, हेलमेट, सुरक्षा जूते और आवश्यक प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया था।
इसके बाद कारखाना अधिनियम 1948 की धारा

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