नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मदुरै की हिंदू धर्म परिषद द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें तिरुपरनकुंद्रम सुब्रमण्य स्वामी मंदिर का नियंत्रण एएसआई (Archaeological Survey of India) के हाथ में देने की मांग की गई थी। यह याचिका मंदिर में दीपाथून (पत्थर का लैंप पोस्ट) पर दीया जलाने के विवाद से जुड़ी है।मामला सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जस्टिस अरविंद कुमार और विपुल एम पंचोली के समक्ष सुनवाई के लिए आया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की कि मंदिर की पारंपरिक धार्मिक प्रथा के तहत तिरुपरनकुंद्रम हिल के दीपाथून पर 24 घंटे लगातार दीया जलाने की अनुमति दी जाए। मद्रास हाई कोर्ट ने पहले 6 जनवरी को अपने फैसले में यह आदेश बरकरार रखा था कि पारंपरिक कार्तिगई दीपम पर्व के दौरान दीया पहाड़ी की चोटी पर जलाना जारी रहे।हालांकि, राज्य सरकार ने इस फैसले का विरोध किया और कहा कि पहाड़ी पर दीया जलाने का कोई पक्का सबूत नहीं है, और यह सिकंदर दरगाह के पास होने के कारण कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न कर सकता है। कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी कर मामले की आगे की सुनवाई के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।याचिकाकर्ता का दावा है कि दीया जलाना मंदिर और कार्तिगई दीपम उत्सव से जुड़ी एक पुरानी और ऐतिहासिक प्रथा है, और इसका धार्मिक महत्व है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी होना इस विवाद को न्यायिक समीक्षा के दायरे में लाता है और मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से इस पर आगे की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मदुरै की हिंदू धर्म परिषद द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें तिरुपरनकुंद्रम सुब्रमण्य स्वामी मंदिर का नियंत्रण एएसआई (Archaeological Survey of India) के हाथ में देने की मांग की गई थी। यह याचिका मंदिर में दीपाथून (पत्थर का लैंप पोस्ट) पर दीया जलाने के विवाद से जुड़ी है।
मामला सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जस्टिस अरविंद कुमार और विपुल एम पंचोली के समक्ष सुनवाई के लिए आया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की कि मंदिर की पारंपरिक धार्मिक प्रथा के तहत तिरुपरनकुंद्रम हिल के दीपाथून पर 24 घंटे लगातार दीया जलाने की अनुमति दी जाए। मद्रास हाई कोर्ट ने पहले 6 जनवरी को अपने फैसले में यह आदेश बरकरार रखा था कि पारंपरिक कार्तिगई दीपम पर्व के दौरान दीया पहाड़ी की चोटी पर जलाना जारी रहे।
हालांकि, राज्य सरकार ने इस फैसले का विरोध किया और कहा कि पहाड़ी पर दीया जलाने का कोई पक्का सबूत नहीं है, और यह सिकंदर दरगाह के पास होने के कारण कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न कर सकता है। कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी कर मामले की आगे की सुनवाई के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि दीया जलाना मंदिर और कार्तिगई दीपम उत्सव से जुड़ी एक पुरानी और ऐतिहासिक प्रथा है, और इसका धार्मिक महत्व है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी होना इस विवाद को न्यायिक समीक्षा के दायरे में लाता है और मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से इस पर आगे की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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