प्रयागराज: माघ मेले 2026 के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन द्वारा नोटिस और रोक के बावजूद अपनी अडिग स्थिति बनाए रखी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि "हम टुकड़ों पर पलने वाले लोग नहीं हैं।" माघ मेले में भूमि और सुविधाओं को रद्द करने की धमकी के बावजूद शंकराचार्य ने यह घोषणा की कि जब तक प्रशासन सम्मानपूर्वक संगम स्नान नहीं कराता, वे शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अगर इस बार प्रवेश नहीं हुआ तो वे अगले साल फिर आएंगे, लेकिन पलकी पर ही बैठे रहेंगे, जैसा कि मौनी अमावस्या के दिन पुलिस द्वारा उन्हें रोक दिया गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया “कालनेमि” बयान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग गोहत्या और गोमांस एक्सपोर्ट के लिए जिम्मेदार हैं, वही असली कालनेमि हैं।माघ मेले में प्रशासन ने 19 जनवरी को शंकराचार्य को पहला नोटिस भेजा था, जिसमें उनके शिविर में “शंकराचार्य” शब्द के इस्तेमाल को लेकर जवाब मांगा गया। 22 जनवरी को दूसरा नोटिस जारी हुआ, जिसमें उनकी भूमि और सुविधाओं को रद्द करने की धमकी दी गई।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन नोटिसों का जवाब देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने गलत आवंटन किया था तो वे इसे वापस ले सकते हैं, लेकिन उन्हें यह बताना होगा कि क्यों दिया और क्यों वापस लिया जा रहा है।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत 23 जनवरी को अचानक खराब हुई, जिसके बाद उन्होंने शिविर के बाहर वैन में आराम किया। इसके बावजूद, उन्होंने अपने अनुयायियों और मीडिया के सामने अपनी अडिग स्थिति व्यक्त की।इस पूरे घटनाक्रम के दौरान शंकराचार्य ने प्रशासन की जिद और हाथी या बुलडोजर जैसी भीड़ प्रबंधन रणनीतियों पर भी सवाल उठाए, और कहा कि उनकी पलकी से किसी प्रकार की भगदड़ नहीं होगी, क्योंकि वे सुरक्षित तरीके से धरने पर बैठे हैं।यह मामला राजनीतिक, धार्मिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन चुका है।मुख्य बिंदु:माघ मेले में शंकराचार्य ने संगम स्नान के बिना शिविर प्रवेश नहीं किया।प्रशासन ने दो नोटिस जारी किए: एक शंकराचार्य के दर्जे को प्रमाणित करने के लिए और दूसरा भूमि और सुविधाओं को रद्द करने के लिए।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “कालनेमि” बयान पर शंकराचार्य ने कड़ा सवाल उठाया।धरना सातवें दिन भी जारी, अनुयायी उनका समर्थन कर रहे हैं।
प्रयागराज: माघ मेले 2026 के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन द्वारा नोटिस और रोक के बावजूद अपनी अडिग स्थिति बनाए रखी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि "हम टुकड़ों पर पलने वाले लोग नहीं हैं।" माघ मेले में भूमि और सुविधाओं को रद्द करने की धमकी के बावजूद शंकराचार्य ने यह घोषणा की कि जब तक प्रशासन सम्मानपूर्वक संगम स्नान नहीं कराता, वे शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अगर इस बार प्रवेश नहीं हुआ तो वे अगले साल फिर आएंगे, लेकिन पलकी पर ही बैठे रहेंगे, जैसा कि मौनी अमावस्या के दिन पुलिस द्वारा उन्हें रोक दिया गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया “कालनेमि” बयान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग गोहत्या और गोमांस एक्सपोर्ट के लिए जिम्मेदार हैं, वही असली कालनेमि हैं।
माघ मेले में प्रशासन ने 19 जनवरी को शंकराचार्य को पहला नोटिस भेजा था, जिसमें उनके शिविर में “शंकराचार्य” शब्द के इस्तेमाल को लेकर जवाब मांगा गया। 22 जनवरी को दूसरा नोटिस जारी हुआ, जिसमें उनकी भूमि और सुविधाओं को रद्द करने की धमकी दी गई।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन नोटिसों का जवाब देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने गलत आवंटन किया था तो वे इसे वापस ले सकते हैं, लेकिन उन्हें यह बताना होगा कि क्यों दिया और क्यों वापस लिया जा रहा है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत 23 जनवरी को अचानक खराब हुई, जिसके बाद उन्होंने शिविर के बाहर वैन में आराम किया। इसके बावजूद, उन्होंने अपने अनुयायियों और मीडिया के सामने अपनी अडिग स्थिति व्यक्त की।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान शंकराचार्य ने प्रशासन की जिद और हाथी या बुलडोजर जैसी भीड़ प्रबंधन रणनीतियों पर भी सवाल उठाए, और कहा कि उनकी पलकी से किसी प्रकार की भगदड़ नहीं होगी, क्योंकि वे सुरक्षित तरीके से धरने पर बैठे हैं।
यह मामला राजनीतिक, धार्मिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन चुका है।
मुख्य बिंदु:
माघ मेले में शंकराचार्य ने संगम स्नान के बिना शिविर प्रवेश नहीं किया।
प्रशासन ने दो नोटिस जारी किए: एक शंकराचार्य के दर्जे को प्रमाणित करने के लिए और दूसरा भूमि और सुविधाओं को रद्द करने के लिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “कालनेमि” बयान पर शंकराचार्य ने कड़ा सवाल उठाया।
धरना सातवें दिन भी जारी, अनुयायी उनका समर्थन कर रहे हैं।
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