नई दिल्ली: देशभर में लंबी दूरी की रेल यात्रा करने वाले लाखों यात्री यूनियन बजट 2026-27 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यात्रियों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस बार के बजट में ऐसे ठोस कदम उठाएगी, जिससे रेल यात्रा अधिक सुरक्षित, आरामदायक, समयबद्ध और किफायती बन सके।बजट से पहले यात्रियों की प्रमुख मांगों में बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक तकनीक, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और किराए में राहत शामिल है। खासतौर पर सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत में ट्रेनों की देरी एक बड़ी समस्या बन जाती है, जिससे यात्रियों के यात्रा कार्यक्रम प्रभावित होते हैं। यात्रियों का मानना है कि एडवांस टेक्नोलॉजी के जरिए इस समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है।रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि देश में बढ़ती आबादी और यात्रियों की संख्या को देखते हुए ट्रैक कैपेसिटी बढ़ाना बेहद जरूरी है। ट्रैक डबलिंग और नई लाइनों के निर्माण से न सिर्फ ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी, बल्कि भीड़ और वेटिंग लिस्ट की समस्या भी कम होगी।नियमित यात्री और होममेकर गीतांजलि शाह ने कहा कि रेलवे ने कई फास्ट ट्रेनें शुरू की हैं, लेकिन लंबी दूरी के यात्रियों के लिए और ज्यादा सुपरफास्ट ट्रेनों की जरूरत है। इससे यात्रा समय कम होगा और अलग-अलग शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।मार्केटिंग सेक्टर में काम करने वाली झरना ने उम्मीद जताई कि सरकार के बेहतर सुविधाओं के वादे ज़मीन पर भी दिखेंगे, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और ट्रेन यात्रा भविष्य में ज्यादा आरामदायक बन सकेगी।यात्रियों और विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि रेलवे को AI-इनेबल्ड कैमरे, इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग सिस्टम, एंटी-कोलिजन डिवाइस ‘कवच’ और नए LHB कोच जैसे आधुनिक सुरक्षा उपायों पर बजट में ज्यादा फंड देना चाहिए। इसके साथ ही साफ-सफाई, वेस्ट मैनेजमेंट और पर्यावरण के अनुकूल सुविधाओं के लिए भी विशेष प्रावधान की मांग की जा रही है।मेडिकल सेक्टर से जुड़े हरीश टम्टा का कहना है कि रेलवे को आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों को ध्यान में रखते हुए जनरल क्लास कोच की संख्या बढ़ानी चाहिए। एसी कोच के बजाय आम यात्रियों के लिए ज्यादा सुविधाएं देने से रेल यात्रा सभी वर्गों के लिए सुलभ होगी।रिटायर्ड अधिकारी और रेलवे एक्सपर्ट बीसी शर्मा ने फ्लेक्सी-फेयर सिस्टम पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने सरकार से इस किराया व्यवस्था की समीक्षा करने या इसे हटाने की मांग की।वहीं रेलवे से रिटायर सुपरिटेंडेंट सोमनाथ मलिक का कहना है कि लगातार ज्यादा डिमांड वाले रूट्स पर डुप्लीकेट ट्रेनें चलाने से न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि रेलवे की आय में भी इजाफा होगा।गौरतलब है कि यूनियन बजट 2025-26 में रेलवे को 2.65 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडिचर मिला था, जिसमें सेफ्टी, ट्रैक डबलिंग, नई रेलवे लाइनें, सिग्नलिंग और रोलिंग स्टॉक पर खास फोकस किया गया था। ऐसे में अब यात्रियों को उम्मीद है कि आने वाला बजट रेलवे के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के साथ-साथ आम यात्रियों की जरूरतों को भी प्राथमिकता देगा।
नई दिल्ली: देशभर में लंबी दूरी की रेल यात्रा करने वाले लाखों यात्री यूनियन बजट 2026-27 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यात्रियों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस बार के बजट में ऐसे ठोस कदम उठाएगी, जिससे रेल यात्रा अधिक सुरक्षित, आरामदायक, समयबद्ध और किफायती बन सके।
बजट से पहले यात्रियों की प्रमुख मांगों में बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक तकनीक, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और किराए में राहत शामिल है। खासतौर पर सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत में ट्रेनों की देरी एक बड़ी समस्या बन जाती है, जिससे यात्रियों के यात्रा कार्यक्रम प्रभावित होते हैं। यात्रियों का मानना है कि एडवांस टेक्नोलॉजी के जरिए इस समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि देश में बढ़ती आबादी और यात्रियों की संख्या को देखते हुए ट्रैक कैपेसिटी बढ़ाना बेहद जरूरी है। ट्रैक डबलिंग और नई लाइनों के निर्माण से न सिर्फ ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी, बल्कि भीड़ और वेटिंग लिस्ट की समस्या भी कम होगी।
नियमित यात्री और होममेकर गीतांजलि शाह ने कहा कि रेलवे ने कई फास्ट ट्रेनें शुरू की हैं, लेकिन लंबी दूरी के यात्रियों के लिए और ज्यादा सुपरफास्ट ट्रेनों की जरूरत है। इससे यात्रा समय कम होगा और अलग-अलग शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
मार्केटिंग सेक्टर में काम करने वाली झरना ने उम्मीद जताई कि सरकार के बेहतर सुविधाओं के वादे ज़मीन पर भी दिखेंगे, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और ट्रेन यात्रा भविष्य में ज्यादा आरामदायक बन सकेगी।
यात्रियों और विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि रेलवे को AI-इनेबल्ड कैमरे, इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग सिस्टम, एंटी-कोलिजन डिवाइस ‘कवच’ और नए LHB कोच जैसे आधुनिक सुरक्षा उपायों पर बजट में ज्यादा फंड देना चाहिए। इसके साथ ही साफ-सफाई, वेस्ट मैनेजमेंट और पर्यावरण के अनुकूल सुविधाओं के लिए भी विशेष प्रावधान की मांग की जा रही है।
मेडिकल सेक्टर से जुड़े हरीश टम्टा का कहना है कि रेलवे को आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों को ध्यान में रखते हुए जनरल क्लास कोच की संख्या बढ़ानी चाहिए। एसी कोच के बजाय आम यात्रियों के लिए ज्यादा सुविधाएं देने से रेल यात्रा सभी वर्गों के लिए सुलभ होगी।
रिटायर्ड अधिकारी और रेलवे एक्सपर्ट बीसी शर्मा ने फ्लेक्सी-फेयर सिस्टम पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने सरकार से इस किराया व्यवस्था की समीक्षा करने या इसे हटाने की मांग की।
वहीं रेलवे से रिटायर सुपरिटेंडेंट सोमनाथ मलिक का कहना है कि लगातार ज्यादा डिमांड वाले रूट्स पर डुप्लीकेट ट्रेनें चलाने से न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि रेलवे की आय में भी इजाफा होगा।
गौरतलब है कि यूनियन बजट 2025-26 में रेलवे को 2.65 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडिचर मिला था, जिसमें सेफ्टी, ट्रैक डबलिंग, नई रेलवे लाइनें, सिग्नलिंग और रोलिंग स्टॉक पर खास फोकस किया गया था। ऐसे में अब यात्रियों को उम्मीद है कि आने वाला बजट रेलवे के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के साथ-साथ आम यात्रियों की जरूरतों को भी प्राथमिकता देगा।
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