भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला: 40 करोड़ की गड़बड़ी, 3 पटवारियों के खिलाफ EOW-ACB ने पेश किया 500 पेज का चालान

रायपुर।
भारतमाला परियोजना के तहत सामने आए बहुचर्चित मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन लोक सेवकों के खिलाफ कोर्ट में 500 पेज का प्रथम पूरक चालान पेश किया है। यह चालान शनिवार को विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

EOW-ACB ने 29 अक्टूबर 2025 को इस मामले में तीन पटवारियों — दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया है कि इन तीनों लोक सेवकों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत पद का दुरुपयोग करते हुए शासन को करीब 40 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई है।

जांच एजेंसी के अनुसार, रायपुर–विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भू-अर्जन प्रक्रिया के दौरान अधिग्रहीत भूमि को नियम विरुद्ध तरीके से पुनः शासन को विक्रय दिखाकर मुआवजा दिलाया गया। इसके अलावा निजी भूमि का गलत मुआवजा, बैकडेट में बंटवारा और नामांतरण, वास्तविक भूमि स्वामी के बजाय अन्य व्यक्तियों को मुआवजा भुगतान जैसे गंभीर अनियमितताएं की गईं।

🔎 पटवारियों की भूमिका इस प्रकार रही:

  • दिनेश पटेल (तत्कालीन पटवारी, हल्का नं. 49, ग्राम नायकबांधा) पर खाता दुरुस्ती, प्रपत्र-10 और आपत्ति निराकरण प्रक्रिया के जरिए अधिग्रहीत भूमि को कृत्रिम उपखंडों में दर्शाकर अधिक मुआवजा दिलाने का आरोप है। इससे शासन को 30 करोड़ 82 लाख 14 हजार 868 रुपये की क्षति हुई।

  • लेखराम देवांगन (तत्कालीन पटवारी, ग्राम टोकरो, हल्का नं. 24) ने मूल खसरों को कृत्रिम उपखंडों में दर्शाकर वास्तविक देय राशि से कहीं अधिक मुआवजा भुगतान कराया। इससे शासन को 7 करोड़ 16 लाख 26 हजार 925 रुपये का नुकसान हुआ।

  • बसंती घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी, ग्राम भेलवाडीह) पर अवार्ड चरण में मूल खसरों को गलत तरीके से विभाजित दिखाकर अतिरिक्त मुआवजा दिलाने का आरोप है। इस मामले में शासन को 1 करोड़ 67 लाख 47 हजार 464 रुपये की आर्थिक क्षति हुई।

EOW और ACB ने संकेत दिए हैं कि इस घोटाले में अन्य अधिकारियों और लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच जारी है और आने वाले समय में और गिरफ्तारियां संभव हैं। भारतमाला परियोजना से जुड़े इस बड़े घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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